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 वैष्णव संतों ने की आचार्य बालकृष्ण से भेंट

पतंजलि योगपीठ ने योग व आयुर्वेद के माध्यम से पूरे विश्व में बढ़ाया भारत का मान-श्रीमहंत राजेंद्रदास

असाध्य रोगों के उपचार में भी कारगर है योग व आयुर्वेद-आचार्य बालकृष्ण



हरिद्वार, 27 मई। अखिल भारतीय वैष्णव अखाड़ा परिषद के पदाधिकारियों ने पतंजलि योगपीठ पहुंच कर आचार्य बालकृष्ण महाराज से भेंट वार्ता की और योग गुरु बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण को समर्थन प्रदान किया। वैष्णव संतों ने आचार्य बालकृष्ण का शाॅल ओढ़ाकर सम्मान किया। चर्चा के दौरान अखिल भारतीय श्रीपंच निर्मोही अनी अखाड़े के अध्यक्ष श्रीमहंत राजेंद्र दास महाराज ने कहा कि योग गुरु बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण महाराज ने योग एवं आयुर्वेद के माध्यम से पूरे विश्व में भारत का मान बढ़ाया है। योग और आयुर्वेद चिकित्सा प्राचीन काल से ही भारत में प्रचलित है। जिनका व्यक्ति के शरीर पर कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ता। योग एवं आयुर्वेद के माध्यम से जटिल से जटिल समस्याओं को भी दूर किया जा सकता है। कोरोना महामारी के दौरान पतंजलि योगपीठ द्वारा निर्मित दवाओं से लाखों की संख्या में लोग ठीक हो रहे हैं। ऐसे में आयुर्वेद पर सवाल उठाना बिल्कुल भी ठीक नहीं है। अखिल भारतीय श्रीपंच निर्वाणी अनी अखाड़े के अध्यक्ष श्रीमहंत धर्मदास महाराज ने कहा कि योग गुरु बाबा रामदेव एवं आचार्य बालकृष्ण ने भारत को योग एवं आयुर्वेद चिकित्सा प्रणाली की ओर ले जाकर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य के क्षेत्र में अपना अहम योगदान प्रदान कर रहे है। वर्तमान में 200 से ज्यादा देश के लोग योग प्रणाली को अपनाकर स्वस्थ हो रहे हैं। महामंडलेश्वर सांवरिया बाबा ने कहा कि योग गुरु बाबा रामदेव एवं आचार्य बालकृष्ण भारत की शान है। जिन्होंने पूरे विश्व में भारत का गौरव बढ़ाया है। आयुर्वेद एकमात्र ऐसी चिकित्सा पद्धति है। जिसका व्यक्ति के शरीर पर कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ता। प्राचीन काल से ऋषि मुनियों द्वारा अपनाई जा रही इस चिकित्सा पद्धति से बड़े से बड़े असाध्य रोगों को भी दूर किया जा सकता है। पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण महाराज ने फूलमाला पहनाकर संतों का स्वागत करते हुए कहा कि सौभाग्य की बात है कि देश का संत समाज पतंजलि योगपीठ के साथ है। संतों का समर्थन लगातार पतंजलि योगपीठ को प्राप्त हो रहा है। उन्होंने कहा कि भारतीय ऋषि मुनियों द्वारा प्रणीत योग व आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति को आज विश्व अपना रहा है। असाध्य रोगों के उपचार में भी योग व आयुर्वेद पूरी तरह कारगर है। योग को पूरे विश्व में लोकप्रिय बनाने में पतंजलि योगपीठ का अहम योगदान रहा है। योग व आयुर्वेद पर पतंजलि योगपीठ द्वारा किए जा रहे अनुसंधानों का लाभ देश दुनिया को मिल रहा है। इस दौरान महंत मोहनदास खाकी, महंत रामजीदास, सांवरिया बाबा, महंत अगस्त दास, महंत मनीष दास, महंत नरेंद्र दास, महंत महेश दास, महंत नागा सुखदेव दास, ब्रहमाण्ड गुरू अनन्त महाप्रभु, महंत बिहारी शरण दास आदि संतजन शामिल रहे।


Posted on May 27, 2021 AuthorVicky Saini Comment(0)वैष्णव संतों ने की आचार्य बालकृष्ण से भेंट
असाध्य रोगों के उपचार में भी कारगर है योग व आयुर्वेद-आचार्य बालकृष्णहरिद्वार, 27 मई। अखिल भारतीय वैष्णव अखाड़ा परिषद के पदाधिकारियों ने पतंजलि योगपीठ पहुंच कर आचार्य बालकृष्ण महाराज से भेंट वार्ता की और योग गुरु बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण को समर्थन प्रदान किया। वैष्णव संतों ने आचार्य बालकृष्ण का शाॅल ओढ़ाकर सम्मान किया। चर्चा के दौरान अखिल भारतीय श्रीपंच निर्मोही अनी अखाड़े के अध्यक्ष श्रीमहंत राजेंद्र दास महाराज ने कहा कि योग गुरु बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण महाराज ने योग एवं आयुर्वेद के माध्यम से पूरे विश्व में भारत का मान बढ़ाया है। योग और आयुर्वेद चिकित्सा प्राचीन काल से ही भारत में प्रचलित है। जिनका व्यक्ति के शरीर पर कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ता। योग एवं आयुर्वेद के माध्यम से जटिल से जटिल समस्याओं को भी दूर किया जा सकता है। कोरोना महामारी के दौरान पतंजलि योगपीठ द्वारा निर्मित दवाओं से लाखों की संख्या में लोग ठीक हो रहे हैं। ऐसे में आयुर्वेद पर सवाल उठाना बिल्कुल भी ठीक नहीं है। अखिल भारतीय श्रीपंच निर्वाणी अनी अखाड़े के अध्यक्ष श्रीमहंत धर्मदास महाराज ने कहा कि योग गुरु बाबा रामदेव एवं आचार्य बालकृष्ण ने भारत को योग एवं आयुर्वेद चिकित्सा प्रणाली की ओर ले जाकर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य के क्षेत्र में अपना अहम योगदान प्रदान कर रहे है।ं वर्तमान में 200 से ज्यादा देश के लोग योग प्रणाली को अपनाकर स्वस्थ हो रहे हैं। महामंडलेश्वर सांवरिया बाबा ने कहा कि योग गुरु बाबा रामदेव एवं आचार्य बालकृष्ण भारत की शान है। जिन्होंने पूरे विश्व में भारत का गौरव बढ़ाया है। आयुर्वेद एकमात्र ऐसी चिकित्सा पद्धति है। जिसका व्यक्ति के शरीर पर कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ता। प्राचीन काल से ऋषि मुनियों द्वारा अपनाई जा रही इस चिकित्सा पद्धति से बड़े से बड़े असाध्य रोगों को भी दूर किया जा सकता है। पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण महाराज ने फूलमाला पहनाकर संतों का स्वागत करते हुए कहा कि सौभाग्य की बात है कि देश का संत समाज पतंजलि योगपीठ के साथ है। संतों का समर्थन लगातार पतंजलि योगपीठ को प्राप्त हो रहा है। उन्होंने कहा कि भारतीय ऋषि मुनियों द्वारा प्रणीत योग व आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति को आज विश्व अपना रहा है। असाध्य रोगों के उपचार में भी योग व आयुर्वेद पूरी तरह कारगर है। योग को पूरे विश्व में लोकप्रिय बनाने में पतंजलि योगपीठ का अहम योगदान रहा है। योग व आयुर्वेद पर पतंजलि योगपीठ द्वारा किए जा रहे अनुसंधानों का लाभ देश दुनिया को मिल रहा है। इस दौरान महंत मोहनदास खाकी, महंत रामजीदास, सांवरिया बाबा, महंत अगस्त दास, महंत मनीष दास, महंत नरेंद्र दास, महंत महेश दास, महंत नागा सुखदेव दास, ब्रहमाण्ड गुरू अनन्त महाप्रभु, महंत बिहारी शरण दास आदि संतजन शामिल रहे।
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